एक देश, एक चुनाव विधेयक पर संसद में जोरदार चर्चा

लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ कराने के लिए ‘एक देश, एक चुनाव’ विधेयक पर संसद में जोरदार चर्चा जारी है। जानें विधेयक के पक्ष और विपक्ष के विचार।
- लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ कराने का प्रस्ताव
- विधेयक पर संसद में जोरदार चर्चा
- विपक्ष का आरोप: संविधान के संघीय ढांचे पर हमला
- सरकार का पक्ष: प्रशासनिक और आर्थिक सुधार
- संयुक्त संसदीय समिति की पहली बैठक 8 जनवरी 2025 को
परिचय
लोकसभा चुनाव और राज्य विधानसभाओं के चुनाव एक साथ कराने के उद्देश्य से ‘एक देश, एक चुनाव’ से संबंधित संविधान (129वां) संशोधन विधेयक और एक अन्य विधेयक को संसद के शीतकालीन सत्र में पेश किया गया था। इन विधेयकों को संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) के पास भेजा गया है, जिसमें विभिन्न राजनीतिक दलों के 39 सदस्य शामिल हैं।
मुख्य जानकारी
केंद्र सरकार के प्रस्तावित संशोधन विधेयक का उद्देश्य चुनाव कराए जाने की प्रक्रिया को सरल और एकीकृत करना है, जिससे समय और संसाधनों की बचत हो सके। इस विधेयक पर 17 अगस्त को लोकसभा में चर्चा हुई, जिसमें 263 सदस्यों ने समर्थन और 198 सदस्यों ने विरोध किया। इसके बाद, विधेयक को पुनर्विचार और सुधार के लिए जेपीसी को सौंप दिया गया। इस समिति की पहली बैठक 8 जनवरी 2025 को आयोजित होगी।
विपक्ष की प्रतिक्रिया
कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने इस विधेयक का विरोध करते हुए इसे संविधान के संघीय ढांचे पर हमला बताया है। उनका तर्क है कि ऐसे कदम से राज्यों की स्वायत्तता खतरे में पड़ सकती है। कांग्रेस सांसद रणदीप सिंह सुरजेवाला ने कहा, “यह विधेयक संविधान की आत्मा के खिलाफ है और लोकतंत्र के मूल सिद्धांतों पर चोट करता है।”
सरकार का पक्ष
कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने विपक्ष के आरोपों का खंडन करते हुए कहा कि ‘एक देश, एक चुनाव’ का उद्देश्य केवल प्रशासनिक और आर्थिक सुधार करना है। उनके अनुसार, “इस विधेयक से राज्यों की शक्तियों में कोई कटौती नहीं होगी और यह पूर्ण रूप से संविधान सम्मत है।”
अन्य देशों के उदाहरण
देशों के उदाहरणों को देखें तो, ऐसे कई देश हैं जहां एक साथ चुनाव कराए जाते हैं। इन देशों में संसाधनों और समय की महत्वपूर्ण बचत होती है। उदाहरण के लिए, इंग्लैंड और दक्षिण अफ्रीका में एक साथ चुनाव की परंपरा है, जिससे नागरिकों को बार-बार चुनावी प्रक्रिया से नहीं गुजरना पड़ता।
निष्कर्ष
संयुक्त संसदीय समिति की रिपोर्ट और संसद में विस्तृत चर्चा के बाद ही इस विधेयक के भविष्य का निर्धारण होगा। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सरकार और विपक्ष के बीच इस मुद्दे पर क्या सहमति बनती है। फिलहाल, ‘एक देश, एक चुनाव’ विधेयक भारतीय राजनीति में एक महत्वपूर्ण मुद्दा बन चुका है, जिसमें विभिन्न पक्षों के विचार और चिंता शामिल हैं।




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