बिहार के 34 स्कूल प्रधानाध्यापकों से शिक्षा विभाग ने मांगा स्पष्टीकरण

बिहार के दारौंदा स्थित 34 स्कूलों के प्रधानाध्यापकों से शिक्षा विभाग ने 25 प्रतिशत से कम आधार कार्ड बनाने पर स्पष्टीकरण मांगा है। जानें पूरी खबर!

  • बिहार के 34 प्रधानाध्यापकों से स्पष्टीकरण मांगा गया।
  • प्रधानाध्यापकों को 24 घंटे के अंदर जवाब देने का निर्देश।
  • सिवान पुलिस कर्मियों के लिए नए नियमों का अनुपालन।
  • शिक्षा सेवकों की ई-शिक्षा कोष पर ऑनलाइन उपस्थिति सुनिश्चित।

परिचय

बिहार के दारौंदा स्थित 34 स्कूलों के प्रधानाध्यापकों के लिए मुश्किलें बढ़ गई हैं। शिक्षा विभाग ने 25 प्रतिशत से कम आधार कार्ड बनाने वाले प्रधानाध्यापकों से स्पष्टीकरण मांगा है।

मुख्य जानकारी

शिक्षा विभाग ने साफ कर दिया है कि यदि 24 घंटे के अंदर प्रधानाध्यापकों की तरफ से संतोषजनक जवाब नहीं आता है, तो विभागीय कार्रवाई की जाएगी। प्रधानाध्यापकों को अपने स्कूलों में शत-प्रतिशत आधार कार्ड बनाने के निर्देश दिए गए हैं।

सिवान के पुलिस कर्मियों के नए नियम

इस दौरान, सिवान में पुलिस कर्मियों के लिए जारी नए नियमों को लेकर भी हड़कंप मचा है। डीआईजी के आदेश ने सख्ती का माहौल बना दिया है, जिससे पुलिस कर्मियों में हलचल मची हुई है।

प्रधानाध्यापकों की सैलरी में कटौती

इसके साथ ही, बिहार के एक जिले के 128 प्रधानाध्यापकों की सैलरी में कटौती की जा रही है। यह कदम उनकी लापरवाही के कारण उठाया गया है। विभागीय अधिकारियों के अनुसार, यह लापरवाही छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ के समान है।

ई-शिक्षा कोष पर ऑनलाइन उपस्थिति

मुजफ्फरपुर में डीपीओ साक्षरता संजय कुमार ने बताया कि जुलाई में जिले के सभी टोला शिक्षा सेवक और तालीमी मरकज के शिक्षा सेवकों को अलग-अलग स्कूलों में सम्बद्ध किया गया था। इन शिक्षा सेवकों को सम्बद्ध विद्यालय के पोषक क्षेत्र के अंतर्गत विशेष अभियान चलाकर नामांकित बच्चों की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया था। अबतक 34 शिक्षा सेवकों की ई-शिक्षा कोष पोर्टल पर ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज नहीं हो रही है।

विशेष निर्देश

डीपीओ ने कहा कि इन सभी प्रधानाध्यापकों को 24 घंटे के अंदर स्पष्टीकरण जमा करना होगा। यदि वे जवाब नहीं देते, तो उनके खिलाफ सक्षम प्राधिकार को रिपोर्ट भेजी जाएगी। शिक्षा विभाग का यह सख्त रुख यह सुनिश्चित करता है कि हर बच्चे का आधार कार्ड बने और शिक्षा प्रणाली में पारदर्शिता बरकरार रहे।

निष्कर्ष

इस पूरी घटना ने बिहार के शिक्षा प्रणाली पर सवाल उठाए हैं। यह जरूरी हो गया है कि शिक्षा व्यवस्था में सुधार लाने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं ताकि छात्रों का भविष्य सुरक्षित किया जा सके। शिक्षा विभाग का सख्त रुख इस दिशा में एक अहम कदम सिद्ध हो सकता है।

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