वी नारायणन बने इसरो के नए अध्यक्ष: जानिए उनके प्रमुख कार्य और योगदान

वी नारायणन को इसरो का नया अध्यक्ष नियुक्त किया गया है। जानिए उनके करियर, योगदान और सम्मान के बारे में विस्तृत जानकारी।

  • वी नारायणन को इसरो का नया अध्यक्ष और अंतरिक्ष विभाग का सचिव नियुक्त किया गया है।
  • उनका कार्यकाल दो साल का होगा।
  • नारायणन की विशेषज्ञता रॉकेट और स्पेसक्राफ्ट टेक्नोलॉजी में है।
  • उन्हें कई प्रतिष्ठित पुरस्कारों से नवाजा गया है।
  • एस सोमनाथ ने चंद्रयान-3 जैसे महत्वपूर्ण मिशनों को सफलतापूर्वक पूरा किया।

परिचय

केंद्र सरकार ने प्रतिष्ठित वैज्ञानिक वी नारायणन को भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) का नया अध्यक्ष नियुक्त किया है। नारायणन 14 जनवरी को वर्तमान अध्यक्ष एस सोमनाथ का स्थान लेंगे। इसका कार्यकाल दो साल के लिए होगा। वर्तमान में वे लिक्विड प्रोपल्शन सिस्टम सेंटर (एलपीएससी), वलियामला के निदेशक के रूप में सेवा दे रहे हैं।

वी नारायणन का करियर

वी नारायणन ने 1984 में इसरो से जुड़कर अपने करियर की शुरुआत की। इससे पहले उन्होंने विक्रम साराभाई स्पेस सेंटर (वीएसएससी) में साढ़े चार साल तक काम किया। वीएसएससी में नारायणन ने साउंडिंग रॉकेट्स, ASLV और PSLV जैसे महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट्स पर काम किया।

महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट्स और योगदान

नारायणन ने एलपीएससी में 183 लिक्विड प्रोपल्शन सिस्टम्स और कंट्रोल पावर प्लांट्स तैयार किए। उन्होंने जीएसएलवी एमके-III के C25 क्रायोजेनिक प्रोजेक्ट को सफलतापूर्वक पूरा किया और PSLV के सेकंड और चोर्थ स्टेज को डेवलप करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। चंद्रयान-2, चंद्रयान-3, आदित्य स्पेसक्राफ्ट और जीएसएलवी एमके-III मिशन के प्रोपल्शन सिस्टम्स को भी डेवलप करने में नारायणन का योगदान सराहनीय है।

सम्मान और पुरस्कार

वी नारायणन को कई प्रतिष्ठित पुरस्कार मिले हैं। उन्हें आईआईटी खड़गपुर से सिल्वर मेडल, एस्ट्रोनॉटिकल सोसाइटी ऑफ इंडिया (एएसआई) से गोल्ड मेडल, और नेशनल डिजाइंज अवार्ड जैसे महत्वपूर्ण पुरस्कारों से नवाजा गया है।

एस सोमनाथ का कार्यकाल

एस सोमनाथ ने 14 जनवरी 2022 को इसरो प्रमुख का पदभार ग्रहण किया था। अपने तीन साल के कार्यकाल में उन्होंने चंद्रयान-3 को चांद के साउथ पोल पर सफलतापूर्वक लैंड कराया। उनके कार्यकाल में आदित्य-L1 मिशन को भी लॉन्च किया गया। हालांकि, मार्च 2023 में सोमनाथ ने अपने कैंसर संक्रमित होने की जानकारी साझा की थी।

निष्कर्ष

वी नारायणन की नियुक्ति भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है। उनके नेतृत्व में, इसरो और अधिक ऊंचाइयों को छूने की संभावना है। नारायणन के पास रॉकेट और स्पेसक्राफ्ट टेक्नोलॉजी में गहरी विशेषज्ञता है, जो इसरो के भविष्य के मिशनों को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

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